Friday, 16 July 2010

Deepti - Expression Unlimited ;)






तो आज ब्लॉग का टोपिक हैं हमारी प्यारी दीप्ति ध्यानी - ये सुब्जेक्ट मैंने इसलिए चुना क्यूंकि पिचले कुछ दिनों से दीप्ति और में अपने हॉस्टल वाले मोड में वापस आ गए हैं और ऑफिस में लंच साथ ही करतें हैं तो स्वाभाविक हैं की चर्चा भी बहुत होती हैं एस्पेसिअल्ली हमारे अपने कॉलेज झाँसी को ले कर .... सो उसके साथ मुझे ऐसा लगता हैं की जैसे में वापस कॉलेज लाइफ में पहुच गयीं हूँ ... इससे मेरा तात्पर हैं की मुझे अपनी उम्र थोड़ी कम् लगती हैं ;)


इस फोटो में दीप्ति अपने FACEBOOK में पायी जाती हैं .......

शुरू करतें हैं बात दीप्ति की -
दीप्तम बिलकुल ही फुर्सत में बनाया गया मॉडल हैं भगवान द्वारा - जिसमें उन्होंने कूट कूट कर कॉमिक सेन्स डाला हैं । कहने का मतलब हैं की आप अगर दीप्ति से मिलेंगी तो जायदा देर हसे बिना नहीं रह पायेंगे क्यूंकि उसकी गंभीरता में भी कॉमिक्स सेंस मिलेगा ।
कॉलेज में हमने पूरे ३ साल आपस में कोई ख़ास बात चीत नहीं की मगर आखिरी साल में मेरी और दीप्ति की दोस्ती हुई जो की अब तक बरकरार हैं। मुझे ये बिलकुल याद नहीं की वो कौनसी घडी थी जब हम दोस्त बने मगर शायद हमारे रूम की नजदीकी एक कारन था।
पूरे हॉस्टल में दीप्ति अपने में पायी जाने वाली एक स्पेसी थी ॥ ये फोटो हमारी मेस बोयस के साथ हैं कृपया इससे हमारे कॉलेज के बोयस मत समझ लीजियेगा ... क्यूंकिवो वो याकिनन काफी बेहतर लूक्स में थे और उनको लड़कियों के हॉस्टल आने की इज़ाज़त नहीं थी ;))


हर CT के बाद वो और में अक्सर क्या नहीं कर पाए के बारें में विचार करतें थे और कसम खातें थे की अगली बार जादा आछे से तैयारी करेंगे और इस विचार के साथ कैंटीन में समोसा और चाय चिपका के आतें थे । खाने में हुमदोनो ही अव्वल दर्जे के प्राणी थे और साथ ही साथ हमारे जीवन में उमंग की कमी थी :)))))


मगर दीप्ति की खाने से आप अंदाजा नहीं लग सकतें थे की वो जाता कहाँ हैं क्यूंकि वो फिर भी दुबली पतली सही सब्दो में चिपकी सी ही रहती थी ।
दीप्ति की एक बहुत ही अलग अदा थी - वो एक दिन पहले आपके साथ मार्केट जाने के बारें में बात कर लेगी और दुसरे दिन आप तयार हो के खड़े होंगे और वो अपने कपरे धोने में लगी होगी ... आप परेसान मन से प्रशन करेंगे की दीप्ति बाज़ार कब चलोगी और वो जवाब देगी यार बस ये कपरे धुल जाए और सूख जाए फिर चलतें हैं ( क्यूंकि वो उस्सी कपरे को धो-सुखा-प्रेस करके फिर बाज़ार जाती थी ) :))) और आप अपना खून जला कर उसका इंतज़ार करेंगे ... क्या ये वही सुइट हैं जो बगल पिक्चर में हैं ???????

ये तो दीप्तम की नॉन-गंभीर छवि थी मगर उसकी काफी खूबी भी हैं जैसे की उससे गुस्सा बिलकुल नहीं आता था कम से कम मैंने अपने लिए तो नहीं देखा । मेरी कोई भी हरकत वो हस के ताल देती थी ॥ मगर दिल की वो सोनी कुड़ी हैं ....सोने में इतनी माहिर थी की जब में उसके रूम में जाती तो आधिकतर टाइम उसे सोतें ही पाती थी। रूम के हालत बातातें थे की उसकी मालकिन उसकी सेवा ज़रा भी नहीं करती हैं :))) मतलब वो किसी पिक्चर से निकली हुई character से कम् नहीं है । दीप्तम की अलग ही स्टाइल थी की वो दिन भर सोती थी और रात भर पड़ती थी वो भी बीच बीच में टीवी रूम भी हो आती थी । वो पढाई में काफी होसियार थी और मेहनती भी थी । ये तो थी हमारी कॉलेज की दीप्ति मगर पिक्चर अभी बाकी हैं मेरे दोस्त ..... क्यूंकि अब हमारी दीप्ति की शादी फिक्स हो चुकी थी और वो शादी कर चुकी थी






INTERMISSION






अब मिलतें हैं हमारी शादी शुदा दीप्ति पुनेठा से ( ये लाइन एस्पेसिअल्ली मिस्टर अंशुल पुनेठा के लिए हैं ताकि वो दीप्ति के नाम के आगे पुनेठा खानदान का लाबेल नोट कर सकें ) । सुनो दीप्ति ! अंशुल का मन रकने के लिए कम से कम Facebook पर अपने नाम को बदल दो । मैंने तो ये काम बिना किसी के कहे ही कर डाला था और अब अपने इतने लम्बे नाम को देख देख खुद ही गम करती हूँ । पहले ही इतना लम्बा था और अब तो कुछ जेयदा ही .

दीप्ति पुनेठा - नया Facebook प्रोफाइल :)))))

वैसे ये परेसान आत्मा आज भी हैं बिलकुल पहले की तरह हैं मगर अब इसमें कुछ काम के बदलाव आयें हैं । जैसे की खाना बनाना सीख चुकी हैं और मैंने २-३ बार इसके हाथों का खाना खाया तो लगता हैं की खाना तो आच्छा बना लेती हैं । बस अंशुल क्यूँ दुखी रहता हैं इसका राज नहीं पता चला ?????? हे हे हे ये सिर्फ माज़क था अंशुल इसके लिए तुम हमारी दीप्ति को मत डाटना वर्ना वो तुम्हे पलट कर दातेगी हे हे हे हे । ।


दीप्ति को अगर शादी बदल सकती हैं तो फिर किसी को भी बदल सकती हैं - ये एक कटु सत्य हैं :)

बाकी हमारी दीप्ति की अदाएं आज भी वैसी ही हैं जैसे की पहले थी। दिल की ये काफी बड़ियाँ और मन से एकदम सांफ बंदी हैं । कोई कपट नहीं हैं इसके अन्दर और ये उनमें से एक हैं जिसके साथ अब अपना समय केवल हसतें हसतें बिता सकतें हैं । मुझे काफी ख़ुशी हैं की में इसकी फ्रेंड लिस्ट में हूँ और कोशिश करुँगी की सदा बनी रहूँ । दीप्ति ये गाना तुम्हारे लिए ।


दीप्ति रोच्क्स !!!!!

Deepti you rock baby !!!
फ्रिएंड्स फोरेवर !!!!

सुचना : अगर आपको कोई भी बात बड़ाई चढाई लगे तो कृपया पोलिसे को संपर्क न करें , दीरेक्ट मेरे पास आयें । हम बात-चीत से सुधार ला सकतें हैं ।

7 comments:

  1. फंटास्टिक टापिक...क्या खूब लिखा है ..रसेल पीटर के शब्दों मैं ..मेंड ब्लास्टिंग अर्तिक्ल !!

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  2. in addition to the fact that it is about me....you have actually written very well...matlab maza hi aa gaya padh ke...:))...1 dum mast hindi mein.....bas ab chaa jao blog ki duniya mein...:)....

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  3. are gaana maine ab suna...kya mind blowing gana chipkaya hei shilpi...:D...:D....thanku so much for this nice post and super song..:)

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  4. Dhanyawaad dost :) sab dil se direct panne par likh gaya ... gaana pasand aaya ye jaida important baat hain ;)

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  5. Khatarnak post...bahut hi umda likha hai :-)

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