Friday, 30 July 2010

शिक्षक और उनकी दिखाई राह ....

This blog post is specially for my school teachers who were responsible for creating basic me...

बचपन से ही मन में एक बहुत गहरी इक्छा थी की में बड़ी हो के एक शिक्षक बनु।
मगर जैसे जैसे समय बीता मन में विचार भी बदले, कभी शिक्षक बन्ने का ख्याल आया तो कभी फैशन इन्दुस्ट्री में जाने का मन हुआ ;)अगर में ध्यान से सोचूं तो पता चलता है की में हमेशा आसमंजस में थी की मेरे लिए सबसे बेहतर करियर क्या होगा ।

बचपन में डॉक्टर को देखती तो यकीन हो जाता था की बस यहीं मुझे बनना हैं । उन के सफ़ेद कोट में एक जादू था जो मुझे काफी प्रभावित करता और जब किसी डॉक्टर के पास जाती तो उनके प्यार से बात करने पर और भी यकीन हो जाता की बस यहीं में बनना चाहती हूँ। कमाल की बात ये हैं की आज में एक कंप्यूटर इंजिनियर हूँ और फिलहाल तो में यही कर रही हूँ पैसो की खातिर :)

शिक्षण करियर की डॉलर में अधिक भुगतान नहीं है, लेकिन यह अपनी निजी गरिमा की दृष्टि से अमूल्य है। एक शिक्षक बन्ने के लिए मन से ही नहीं बल्कि अंतर आत्मा से भी पवित्र होना जरुरी हैं ।

मुझे हमेशा वो अध्यापिका पसंद आती थी जो सूती साड़ी पहन के आतीं थी। मैंने अपनी KG से ले के 10th तक की पढाई GHS से पूरी की थी जहाँ केवल बालाएं ही पड़ती थी और इसके बाद इंटर मैंने BHS सहशिक्षा विधालय से पूरी की । मेरे स्कूल में इतनी सुन्दर सुन्दर अद्यापिकाएं थी की उनको देख किसी का भी मन परिवर्तित हो जाएँ ।

मुझे अपनी इतिहास की अद्यापिका आच्छी तरह से याद हैं , हम उन्हें Mrs Simon के नाम से जानतें थे और ये कहना गलत नहीं होगा की वो अपने उम्र से काफी खूबसूरत लगती थी और में बचपन में उन्हें कई बार गुलाब के फूल से संबोधित करती। वो बातों में भी उतनी ही मीठी थी । मुझे याद हैं मेरा भाई BHS में पड़ता था और एक बार बोर्ड की परीक्षा में उनकी ड्यूटी BHS में लगी और शाम को मेरे भाई के दोस्त उनकी तारीफ करतें थक नहीं रहे थे । मुझे लगता हैं उनके अन्दर कोई तो मेंजिक था । वो जब हममे इतिहास समझाती तो उनका ढंग ही अलग होता, वो अक्सर बॉय फ्रेंड और गर्ल फ्रेंड का रेफेरेंस दे के समझाती जो की हममे काफी आसानी से समझ आता था उन दिन ;) उनकी मुस्कराहट आज भी मुझे याद हैं । बस आज ये नहीं पता हैं की वो इस देश के किस किनारे होंगी और कैसी होंगी। क्या आज भी वो इतनी ही खूबसूरत होंगी ?
बस प्राथना हैं इश्वर से की वो जहाँ भी हो खुश और स्वस्थ हो ॥
This is for you Ma'am where ever you are ...







इसी तरह मेरी एक और अद्यापिका थी जिनका नाम है - Mrs Reid वो मेरी ४ (चौथी) की अद्यापिका थी और उनसे भी में बहुत प्रभवित थी क्यों की वो बहुत ही प्यारी थी ...
उनकी बातों में इतनी मिठास थी की कोई उनकी बातों को काट ही नहीं सकता था । उनके कहने पर लड़कियां आसानी से होमेवोर्क कर लेती थी । मैंने उनकी क्लास कभी मिस नहीं की थी ... हां छुट्ठी तब ही ली जब बीमार हुई वर्ना स्कूल जाने में बहुत आनंद आता । मुझे बहुत ख़ुशी हैं की आज भी में उनसे जुडी हूँ Facebook के कारन । मुझे ऐसा लगता हैं की अक्सर हम उचाइ की खोज में नीव खो देतें हैं - और कुछ हिस्सा तो यक़ीनन गुरु का भी हमारी सफलता के पीछे होता हैं । शायद इस पोस्ट से में उन सब शिक्षक को कुछ सम्मान दे सकूं जिन्होंने मेरे भविष्य को सुन्दर बनाने में साथ दिया हैं ।




Friday, 16 July 2010

Deepti - Expression Unlimited ;)






तो आज ब्लॉग का टोपिक हैं हमारी प्यारी दीप्ति ध्यानी - ये सुब्जेक्ट मैंने इसलिए चुना क्यूंकि पिचले कुछ दिनों से दीप्ति और में अपने हॉस्टल वाले मोड में वापस आ गए हैं और ऑफिस में लंच साथ ही करतें हैं तो स्वाभाविक हैं की चर्चा भी बहुत होती हैं एस्पेसिअल्ली हमारे अपने कॉलेज झाँसी को ले कर .... सो उसके साथ मुझे ऐसा लगता हैं की जैसे में वापस कॉलेज लाइफ में पहुच गयीं हूँ ... इससे मेरा तात्पर हैं की मुझे अपनी उम्र थोड़ी कम् लगती हैं ;)


इस फोटो में दीप्ति अपने FACEBOOK में पायी जाती हैं .......

शुरू करतें हैं बात दीप्ति की -
दीप्तम बिलकुल ही फुर्सत में बनाया गया मॉडल हैं भगवान द्वारा - जिसमें उन्होंने कूट कूट कर कॉमिक सेन्स डाला हैं । कहने का मतलब हैं की आप अगर दीप्ति से मिलेंगी तो जायदा देर हसे बिना नहीं रह पायेंगे क्यूंकि उसकी गंभीरता में भी कॉमिक्स सेंस मिलेगा ।
कॉलेज में हमने पूरे ३ साल आपस में कोई ख़ास बात चीत नहीं की मगर आखिरी साल में मेरी और दीप्ति की दोस्ती हुई जो की अब तक बरकरार हैं। मुझे ये बिलकुल याद नहीं की वो कौनसी घडी थी जब हम दोस्त बने मगर शायद हमारे रूम की नजदीकी एक कारन था।
पूरे हॉस्टल में दीप्ति अपने में पायी जाने वाली एक स्पेसी थी ॥ ये फोटो हमारी मेस बोयस के साथ हैं कृपया इससे हमारे कॉलेज के बोयस मत समझ लीजियेगा ... क्यूंकिवो वो याकिनन काफी बेहतर लूक्स में थे और उनको लड़कियों के हॉस्टल आने की इज़ाज़त नहीं थी ;))


हर CT के बाद वो और में अक्सर क्या नहीं कर पाए के बारें में विचार करतें थे और कसम खातें थे की अगली बार जादा आछे से तैयारी करेंगे और इस विचार के साथ कैंटीन में समोसा और चाय चिपका के आतें थे । खाने में हुमदोनो ही अव्वल दर्जे के प्राणी थे और साथ ही साथ हमारे जीवन में उमंग की कमी थी :)))))


मगर दीप्ति की खाने से आप अंदाजा नहीं लग सकतें थे की वो जाता कहाँ हैं क्यूंकि वो फिर भी दुबली पतली सही सब्दो में चिपकी सी ही रहती थी ।
दीप्ति की एक बहुत ही अलग अदा थी - वो एक दिन पहले आपके साथ मार्केट जाने के बारें में बात कर लेगी और दुसरे दिन आप तयार हो के खड़े होंगे और वो अपने कपरे धोने में लगी होगी ... आप परेसान मन से प्रशन करेंगे की दीप्ति बाज़ार कब चलोगी और वो जवाब देगी यार बस ये कपरे धुल जाए और सूख जाए फिर चलतें हैं ( क्यूंकि वो उस्सी कपरे को धो-सुखा-प्रेस करके फिर बाज़ार जाती थी ) :))) और आप अपना खून जला कर उसका इंतज़ार करेंगे ... क्या ये वही सुइट हैं जो बगल पिक्चर में हैं ???????

ये तो दीप्तम की नॉन-गंभीर छवि थी मगर उसकी काफी खूबी भी हैं जैसे की उससे गुस्सा बिलकुल नहीं आता था कम से कम मैंने अपने लिए तो नहीं देखा । मेरी कोई भी हरकत वो हस के ताल देती थी ॥ मगर दिल की वो सोनी कुड़ी हैं ....सोने में इतनी माहिर थी की जब में उसके रूम में जाती तो आधिकतर टाइम उसे सोतें ही पाती थी। रूम के हालत बातातें थे की उसकी मालकिन उसकी सेवा ज़रा भी नहीं करती हैं :))) मतलब वो किसी पिक्चर से निकली हुई character से कम् नहीं है । दीप्तम की अलग ही स्टाइल थी की वो दिन भर सोती थी और रात भर पड़ती थी वो भी बीच बीच में टीवी रूम भी हो आती थी । वो पढाई में काफी होसियार थी और मेहनती भी थी । ये तो थी हमारी कॉलेज की दीप्ति मगर पिक्चर अभी बाकी हैं मेरे दोस्त ..... क्यूंकि अब हमारी दीप्ति की शादी फिक्स हो चुकी थी और वो शादी कर चुकी थी






INTERMISSION






अब मिलतें हैं हमारी शादी शुदा दीप्ति पुनेठा से ( ये लाइन एस्पेसिअल्ली मिस्टर अंशुल पुनेठा के लिए हैं ताकि वो दीप्ति के नाम के आगे पुनेठा खानदान का लाबेल नोट कर सकें ) । सुनो दीप्ति ! अंशुल का मन रकने के लिए कम से कम Facebook पर अपने नाम को बदल दो । मैंने तो ये काम बिना किसी के कहे ही कर डाला था और अब अपने इतने लम्बे नाम को देख देख खुद ही गम करती हूँ । पहले ही इतना लम्बा था और अब तो कुछ जेयदा ही .

दीप्ति पुनेठा - नया Facebook प्रोफाइल :)))))

वैसे ये परेसान आत्मा आज भी हैं बिलकुल पहले की तरह हैं मगर अब इसमें कुछ काम के बदलाव आयें हैं । जैसे की खाना बनाना सीख चुकी हैं और मैंने २-३ बार इसके हाथों का खाना खाया तो लगता हैं की खाना तो आच्छा बना लेती हैं । बस अंशुल क्यूँ दुखी रहता हैं इसका राज नहीं पता चला ?????? हे हे हे ये सिर्फ माज़क था अंशुल इसके लिए तुम हमारी दीप्ति को मत डाटना वर्ना वो तुम्हे पलट कर दातेगी हे हे हे हे । ।


दीप्ति को अगर शादी बदल सकती हैं तो फिर किसी को भी बदल सकती हैं - ये एक कटु सत्य हैं :)

बाकी हमारी दीप्ति की अदाएं आज भी वैसी ही हैं जैसे की पहले थी। दिल की ये काफी बड़ियाँ और मन से एकदम सांफ बंदी हैं । कोई कपट नहीं हैं इसके अन्दर और ये उनमें से एक हैं जिसके साथ अब अपना समय केवल हसतें हसतें बिता सकतें हैं । मुझे काफी ख़ुशी हैं की में इसकी फ्रेंड लिस्ट में हूँ और कोशिश करुँगी की सदा बनी रहूँ । दीप्ति ये गाना तुम्हारे लिए ।


दीप्ति रोच्क्स !!!!!

Deepti you rock baby !!!
फ्रिएंड्स फोरेवर !!!!

सुचना : अगर आपको कोई भी बात बड़ाई चढाई लगे तो कृपया पोलिसे को संपर्क न करें , दीरेक्ट मेरे पास आयें । हम बात-चीत से सुधार ला सकतें हैं ।